सरकार के आरक्षण पर फैसले को चुनौती, निर्णय पर मिला स्टे

Spread the love

फील्ड रिपोर्ट बिलासपुर। प्रदेश सरकार के निर्णय के बाद आरक्षण को लेकर दायर याचिकाओं पर बड़ा फैसला आया। बिलासपुर हाइकोर्ट की युगलपीठ ने सुरक्षित फैसले को 4 अक्टूबर को सार्वजनिक किया। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को तगड़ा झटका देेते हुए 82 प्रतिशत आरक्षण मामले पर स्टे दे दिया है।

गौरतलब है कि प्रदेश सरकार के आरक्षण फीसद बढ़ाने के निर्णय से असंतुष्ट होकर अलग-अलग 4 याचिकायें दायर की गई थीं। मुख्य न्यायाधीश पी रामचंद्र मेनन व न्यायाधीश पार्थ प्रतीम साहू की युगलपीठ ने सुरक्षित फैसले में सरकार के निर्णय पर स्टे और आगामी आदेश तक रोक लगाई गई है।

दरअसल राज्य शासन ने 4 सितंबर 2019 को अध्यादेश जारी कर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग को मिलने वाले आरक्षण को बढ़ा दिया था। इससे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग व केंद्र के गरीब सर्वणों को 10 फीसद आरक्षण को मिलाकर राज्य में आरक्षण 82 फीसद हो गया है। इसके अलावा महिला, दिव्यांग व अन्य वर्ग के लिए प्रावधान जोड़ने पर आरक्षण बढ़ जाएगा। सरकार के फैसले के खिलाफ आदित्य तिवारी, कुणाल शुक्ला, पुनेश्वरनाथ मिश्रा समेत अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रोहित शर्मा ने कहा कि सरकार द्वारा लाया गया यह कानून असंवैधानिक है। और उसी बात पर माननीय उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनते हुए के कई वाद के निर्णय के खिलाफ माना और इसपर रोक लगाई है।

fieldreport