कोयले के काले धंदे में मीडिया माफिया हुआ सक्रिय..!?

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कोयलांचल से बिलासपुर तक कोयला चोरी का गिरोह सक्रिय..!
कोरबा के दीपिका खदान से निकले कोयले की हो रही अफरा-तफरी..!

गंदा है पर धंधा है, कोयले की कालिख मीडिया के मत्थे.!?


बिलासपुर। बिलासपुर शहर से लगे क्षेत्रों में कोयलांचल से आए कोयले की चोरी का गिरोह सक्रिय है। साथ ही कोरबा जिले की खदानों से निकला कोयला अफरा तफरी किया जा रहा है। शहर से लगे रतनपुर बिल्हा हिर्री थाना क्षेत्रों में कोयला चोरी धड़ल्ले से चल रही है। कोल डिपो की बात करें या फिर ट्रेलर से कोयला चोरी की सभी वारदातें शहर के लगे क्षेत्रों में बदस्तूर जारी है। पुलिस का संरक्षण और कुछ मीडिया संस्थानों के नुमाइंदे इस कोयला चोरी के खेल में अपने हाथ काले कर चुके हैं। मीडिया की आड़ लेकर मुनाफा कमाने वाले इन लोगों ने कोयले से लाखों कमाने का रास्ता खोज लिया है और इसी कड़ी में लगातार कोयला चोरी जारी है।

इस पूरे खेल में पुलिस की भूमिका हमेशा से संदेह के घेरे में रही है।

वहीं एक खेल डिपो में भी वर्षों से बदस्तूर चल रहा है। माना जाता है कि कोरबा के गेवरा, दीपका, कुसमुंडा के साथ ही रायगढ़ जिले के छाल सहित प्रदेश की खदानों से निकलने वाले कोयले का परिवहन देश और प्रदेश की फैक्ट्रियों के लिए किया जाता है। इसके लिए बिलासपुर-रायपुर नेशनल हाइवे सड़क ही एकमात्र रूट है। रोज हजारों ट्रकों से यहां से कोयला भेजा जाता है। SECL से कोयला सप्लाई करने के लिए कोल डिपो संचालक, उद्योगों से अनुबंध कर लेते हैं। कोलवाशरियों के लिए भी खदान से कोयले की सप्लाई की जाती है। कोल डिपो संचालक और उनके कर्मचारी खदान से निकलने वाले स्टीम कोयले में घटिया कोयला, पत्थर-मिट्टी मिलावट कर कोयले की अफरा-तफरी करते हैं। इससे उन्हें सीधे तौर पर डबल फायदा होता है। कुछ दिनों पहले ही ऐसे ही एक मामले में कोयला खा पाते हुए रंगे हाथों पकड़े जाने पर एफआईआर दर्ज की गई है।

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