तानाशाही रवैये का आरोप के बाद कलेक्टर ने सुनाया अधिकारियों को फरमान: निमंत्रण कार्ड वितरण में नहीं मिले शिकायत

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तानाशाही रवैये का आरोप के बाद कलेक्टर ने सुनाया अधिकारियों को फरमान: निमंत्रण कार्ड वितरण में नहीं मिले शिकायत
बिलासपुर 12 अप्रैल 2022। तानाशाही रवैये का आरोप लगने के बाद कलेक्टर डॉ सारांश मित्तर में अधिकारियों को फरमान सुनाया है कि बिलासपुर में कार्ड वितरण की शिकायत ज्यादातर आती है ऐसा ना हो! विधायक सांसदों को कार्ड मिले, जिन जनप्रतिनिधियों के निमंत्रण कार्ड है फोन पर बता दें। मंगलवार को कलेक्टर ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आगामी 13 अप्रैल को राज्य स्तरीय किसान मेले में शामिल होने की तैयारियों को लेकर बैठक हुई, जिसमें सभी अधिकारियों को कॉर्ड वितरण को लेकर हिदायत दी और यह तक कहा की हमें नहीं बुलाया यह चीज नहीं आनी चाहिए।

दरअसल कलेक्टर को ऐसा कहना इसलिए पड़ा क्योंकि कुछ दिनों पहले राज्योत्सव के दौरान निमंत्रण कार्ड में विधायक सहित कई जनप्रतिनिधियों के नाम नहीं लिखे गए जिसको लेकर बिलासपुर विधायक शैलेश पांडे ने मुख्यमंत्री के नाम पात्रता के लिख डाला। तानाशाही का आरोप लगाया और राजद्रोह तक की अनुशंसा कर डाली। उन्होंने पत्र में लिखा कि बिलासपुर जिले के प्रशासनिक अमले के मुखिया होने के नाते कलेक्टर ने बिलासपुर में आयोजित राज्योत्सव के कार्यक्रम में उनके (विधायक के) और महापौर, सभापति और जिला पंचायत अध्यक्ष के नाम का उल्लेख निमंत्रण-पत्र में नहीं किया था और ना ही उन्हें विधिवत आमंत्रित किया गया।

नगर विधायक पांडेय ने आरोप लगाया था कि बिलासपुर कलेक्टर के तानाशाही रवैये के कारण बिलासपुर में आपकी सरकार और उनके निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का अपमान किया गया है। विधायक ने पत्र में कहा था कि कलेक्टर बिलासपुर द्वारा किया गया यह कार्य जनता का और सरकार का अपमान है जो कि राजद्रोह की श्रेणी में आता है। विधायक ने कलेक्टर मित्तर को तत्काल बिलासपुर से हटाने और उनके खिलाफ राजद्रोह की कार्रवाई करने की मांग उठायी। इस पूरे मसले के बाद ही कलेक्टर ने इस बार कोई भी कोताही ना बरतें हुए अधिकारियों को बैठक में निर्देशित किया।

आगामी मुख्यमंत्री के बिलासपुर आगमन को लेकर बैठक

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