बड़े मिठाई प्रतिष्ठानों से केवल वसूली की जाती है.! जांच समिति में दूसरे विभागों के सदस्यों को रखा जाता है बाहर.!?

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बिलासपुर । दिवाली के सीजन में मिलावट खोर सक्रिय है लेकिन विभाग उतना ही निष्क्रिय है..! दरअसल बिलासपुर में खाद्य एवं औषधि विभाग की जिम्मेदारी है कि वह त्योहारी सीजन में मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई करें, कार्रवाई के लिए बकायदा टीम भी बनाई गई है लेकिन, सरकारी ऑफिस में फैली राजनीति का यह नतीजा है कि टीम में दर्ज सदस्यों के बजाय, खाद्य एवं औषधि विभाग मनमाने ढंग से कार्यवाही करता है। बिलासपुर में खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारी मोहित बेहरा से जी मिली जानकारी के अनुसार, बीते दो दिनों में मंगला, सरकंडा और तारबहार में तकरीबन 20 से 22 लीगल कार्रवाई की गई है, 100 से ज्यादा सैंपल जप्त किए गए हैं और मिलावट को जांचने के लिए मोबाइल वैन का भी इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी टीम ने कारवाई की है। खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार खाद्य एवं औषधि विभाग के धूर्त अधिकारियों ने जाँच टीम में मौजूद सदस्यों को दरकिनार कर, कार्रवाई को अंजाम दिया है। समिति के सदस्यों के बजाए मोके पर अधिकारियों से ज्यादा मीडिया कर्मी मौजूद रहते हैं। मीडिया के माध्यम से एक बार दबाव बन जाने के बाद जमकर वसूली का खेल खेला जाता है। यही कारण है कि अन्य अधिकारी कर्मचारी खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारियों से नाराज हो जाते हैं। यही कारण है कि जांच टीम के सदस्यों ने खाद्य एवं औषधि विभाग के ऐसे अधिकारियों के खिलाफ दबी ज़ुबान में शिकायत की है। बहरहाल त्योहार सीजन के मौसम में सरकारी विभाग के अधिकारियों ने बड़े मिठाई के प्रतिष्ठान और बेकरी पर कारवाई करने के बजाए छोटे दुकानदारों को आसान शिकार बनाया है। नामचीन और बड़े प्रतिष्ठानों के संचालकों से केवल मोटी रकम वसूली जाती है। बात बनी तो बनी नहीं तो, कार्यवाही कर दी जाती है।

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