जिला अस्पताल भगवान भरोसे चल रहा है, क्योकि जिम्मेदार डाक्टर, संसाधन की भरी कमी और अस्पताल प्रबंधन और सरकार सो रही है।

जांजगीर जिला अस्पताल में स्वास्थ सुविधाओं का टोटा, जिला अस्पताल के ड्यूटी टाइम में जिला अस्पताल में नहीं मिलते डॉक्टर्स, उपचार कराने आने वाले मरीजों को करना पड़ता है, घण्टों घण्टों डॉक्टरों का इन्तजार !
वीओ – लोगों ने डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया है, लेकिन जांजगीर-चांपा जिले के जिला  अस्पताल के डॉक्टर, अपनी इस भगवान की दर्जा को बदनाम करने में लगे है, जिला अस्पताल के डॉक्टर ड्यूटी टाईम में भी अस्पताल से नदारत रहतें हैं, जिससे जिला अस्पताल में ईलाज कराने के लिए पहुंचने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिला अस्पताल में सोनोग्राफी कराने के लिए पहुंचने वाले गर्भवती महिलाओं व ग्रामीण क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य परीक्षण व सोनोग्राफी के लिए लाए मितानिन का आरोप है कि, जिला अस्पताल के डॉक्टर ड्यूटी टाईम में भी अस्पताल से नदारत रहतें हैं, जिससे भारी परेशानी होती है !

जिला अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले बीमार मरीजों को उपचार के लिए घण्टो घण्टो इन्तजार करना पड़ता है, बारिस का मौसम है और ऐसे में, मौसमी बीमारियों का प्रकोप भी इस मौसम में ज्यादा रहता है, ऐसे में अस्पताल में डॉक्टरों का न मिलना मरीजों के लिए बड़ी मुसीबत तो है, जैसे ही लोगों कि इस परेशनी का पता चला तो, हमारी टीम जिला हास्पीटल पहुंची, जहां का नजारा बिलकुल साफ था, जिला अस्पताल के  डॉक्टर अपने चेम्बर में मौजूद ही नही थे, इस पूरे मामले को लेकर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन से चर्चा कि गई, तो सिविल सर्जन महोदय की दलील है कि, जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है, एक ही डॉक्टर है, और सभी तरह की डूयटी करना पड़ता है, और डॉक्टर का कहना है कि, मै एक दिन में 25 से अधिक सोनोग्राफी नहीं करूंगा, स्वास्थ्य मंत्री को डॉक्टरों कि कमी से अवगत कराया गया है, और डॉक्टरों और सोनोग्राफरों की मांग की गई है !



छत्तीसगढ़ में बदहाली के कगार पर पहुंच चुके स्वास्थ्य महकमें पर अगर समय रहते सुधार नही की गई, तो ऐसे में मरीजों के जान पर बन सकती है, अगर समय रहते अस्पताल में डॉक्टरों की कमी को दूर नही किया गया तो, वह दिन दूर नही, जब मरीज अस्पताल आने की बजाय, किसी नीमहकीम के पास ईलाज के लिए जाने को मजबूर होने लगेंगे, जिले के आसपास के क्षेत्र के अस्पतालों में वैसे भी डॉक्टरों कि कमी पहले से ही है, स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में डाक्टरों के कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं, लगातार मांग के बावजूद भी जिले के ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सकों की कमी की पूर्ति नही हो पा रही है, नतीजतन जिला चिकित्सालय केवल प्राथमिक चिकित्सा जैसा बन कर ही रह गया है, उस पर बचे हुए डॉक्टरों कि ड्युटी से नदारद रहने से, परेशान मरीजो कि हाल बेहाल हो रहा है, थक हार कर मरीज इतने मजबूर हो जाते हैं की, अंत में उन्हे प्राईवेट नर्सिंग होम का रूख करना पड़ता है !

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