कथित फर्जी रायल्टी बुक मामले में रायपुर जिला प्रशासन का पक्ष कलेक्टोरेट की खनिज शाखा ने आरोपों को मनगढंत और बेबुनियाद बताया

रायपुर,  राज्य सरकार के निर्देश पर रायपुर और राजनांदगांव जिलों के खनिज अधिकारियों द्वारा फर्जी रायल्टी बुक मामले की जांच की जा रही है। खनिज विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि इस मामले में रायपुर के उप संचालक खनिज प्रशासन द्वारा पिछले महीने की 9 तारीख को स्थानीय सिविल लाइन थाने में और राजनांदगांव में जिला खनिज अधिकारी ने पुलिस को रिपोर्ट दी है, जिसकी विवेचना पुलिस द्वारा की जा रही है।

रायपुर कलेक्टोरेट की खनिज शाखा के उप संचालक  महिपाल सिंह कंवर ने आज बताया कि श्री परमानंद जांगड़े ने छत्तीसगढ़ में कथित फर्जी रायल्टी बुक से रायल्टी क्लियरेंस किए जाने और इससे राज्य सरकार को राजकोष में कथित रूप से अरबो रूपए के नुकसान की शिकायत की थी। खनिज विभाग के अधिकारियों ने कहा कि श्री जांगड़े के आरोप मनगढंत और बेबुनियाद हैं। 

उप संचालक खनिज श्री कंवर ने यह भी बताया कि श्री जांगड़े ने कलेक्टर रायपुर को 6 अगस्त 2018 को यह शिकायत दी थी कि जिले में अवैध पिटपास के जरिए रायल्टी क्लियरेंस किया गया है, जिसमें 6 खनिज पट्टेधारियों के नाम से जारी अभिवहन पास की कार्बन कॉपी के साथ फर्जी परिवहन पास होना बताया गया और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई। श्री जांगड़े की शिकायत की जांच कलेक्ट्रेट रायपुर की खनिज शाखा द्वारा की गई, जिसमें यह पाया गया कि एलएनटी, डीव्ही प्रोजेक्ट कोरबा, क्राम्टन ग्रिविज लिमिटेड गुड़गांव, बार्बिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और बी.एस.बी.के. जैसे बड़ी कम्पनियों को जारी रायल्टी क्लियरेंस में शासकीय कार्यों के लिए जारी अस्थायी अनुज्ञा पत्र प्राप्त किया गया और स्वीकृत खदानों से अभिवहन पास के जरिए खनिज खरीदकर उपयोग किया गया, जिसमें एडवांस रायल्टी जमा कराने के बाद ही अभिवहन पास जारी किए गए हैं। श्री जांगड़े की शिकायत में उल्लेखित पिंकेश शर्मा, दिलीप बिल्डकॉन और अशोक खण्डेलवाल आदि ठेकेदारों को खनिज शाखा द्वारा कोई रायल्टी क्लियरेंस जारी नहीं किया गया। खनिज शाखा रायपुर के अधिकारियों ने जब शिकायत कर्ता से यह जानकारी मांगी कि उन्हें इस प्रकार की पर्चियां कहां से मिली हैं, तो शिकायत कर्ता ने जानकारी देने से इंकार कर दिया। इसके बाद उप संचालक खनिज रायपुर द्वारा सिविल लाइन थाने में आवश्यक कार्रवाई के लिए 9 अगस्त 2018 को एफआईआर दर्ज करवाई गई है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि राजनांदगांव के श्री संतोष अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत अभिवहन पास की जांच खनिज शाखा रायपुर द्वारा की गई और इस मामले में आवश्यक कार्रवाई के लिए 10 अगस्त 2018 को खनिज अधिकारी राजनांदगांव को उनके द्वारा पत्र जारी किया गया।


कंवर ने बताया कि राजनांदगांव कलेक्टोरेट की खनिज शाखा द्वारा श्री संतोष अग्रवाल को रायल्टी क्लियरेंस जारी नहीं करते हुए प्रकरण की जांच पुलिस के माध्यम से करवाई जा रही है, चूंकि प्रकरण में कोई रायल्टी क्लियरेंस जारी नहीं किया गया है, इसलिए यह कहना गलत है कि शासन को रायल्टी की क्षति हुई है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शासकीय निर्माण कार्य समाप्त होने के बाद खनिज अभिवहन पास प्रस्तुत करने पर कलेक्टर द्वारा आवश्यक जांच के बाद रायल्टी चुकता प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। निर्माण विभागों के ठेकेदारों के देयकों से खनिज की रायल्टी काटकर रखी जाती है और संबंधित ठेकेदार द्वारा जिस खनिज मात्रा का अभिवहन पारपत्र प्रस्तुत नहीं किया जाता, तो ऐसे प्रकरणों में उस मात्रा के लिए खान एवं खनिज विकास और विनियमन अधिनियम 1957 की धारा-21 (5) के तहत कार्रवाई की जाती है।
उप संचालक खनिज श्री कंवर के अनुसार रायपुर जिले में कलेक्ट्रेट की खनिज शाखा द्वारा वित्तीय वर्ष 2016-17 से वर्तमान वित्तीय वर्ष 2018-19 में जुलाई 2018 तक अवैध उत्खनन के 89 प्रकरण दर्ज किए गए और उनमें 62 लाख 39 हजार रूपए का जुर्माना वसूल किया गया। इसी तरह अवैध परिवहन के 576 प्रकरण दर्ज किए गए और एक करोड़ 50 लाख 27 हजार रूपए का जुर्माना वसूला गया,

इसलिए यह कहना गलत है कि तत्कालीन कलेक्टर और खनिज अधिकारियों की मिली भगत से खनिज रायल्टी की चोरी करवाई गई है।

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