आवर्तन थिएटर ग्रुप बिलासपुर की आत्मकथा ने बटोरी तालियां…नाटक के माध्यम से दिया संदेश…

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बिलासपुर। आवर्तन थिएटर ग्रुप बिलासपुर ने प्रतिष्ठित लेखक राजाध्यक्ष के निजी जीवन व उनकी रचना प्रक्रिया पर आधारित आत्मकथा का नाटक मंचन किया। नाटक के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि कि कोई भी लेखक भौतिक रूप में मरता है, पर उनकी रचनाएं और पात्र कभी नहीं मरते। इसलिए किसी भी रचनाकार को अपने व्यक्तिगत राग-द्वेश से प्रेरित होकर किसी के चरित्र के साथ अन्याय नहीं करना चाहिए। रविवार रात 8 बजे प्रियदर्शिनी भवन में कार्यक्रम की शुरुआत हुई। तालियों की गड़गड़ाहट से प्रियदर्शिनी भवन गूंजता रहा। रविवार रात 8 बजे प्रियदर्शिनी भवन में कार्यक्रम की शुरुआत हुई। राजाध्यक्ष की भूमिका निभाते हुए प्रोफेसर कृष्ण सोनी ने उनके चरित्र को मंच पर जीवंत किया। प्रज्ञा की भूमिका सुहाली जैन ने बेहतरीन ढंग से निभाया। उत्तरा और उर्मिला की भूमिका अनु चक्रवर्ती व श्रेया सोनी ने निभाई। वासंती व वसुधा की दोहरी भूमिका में तृप्ति वाणी ने दर्शकों को रोमांचित और चकित कर दिया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों और समाज को संदेश दिया कि कोई भी लेखक एक बार किसी पात्र का चित्रण अपनी कृतियों में कर अपने दायित्व का इतिश्री कर लेता है, पर हर चरित्र को अपने प्रत्येक पाठक के साथ जीना पड़ता है। अगर रचनाकार ने किसी चरित्र को कुरूप या अन्य दोषयुक्त चित्रित किया है तो उसे अपने उसी चरित्र में पाठक के साथ जीना पड़ता है। कार्यक्रम में आवर्तन ग्रुप की कलाकार रश्मि पांडेय, सोनाली श्रीवास्तव, सुहाली जैन, श्रेया सोनी, तृप्ति वाणी, अनु चक्रवर्ती, अंकित, रजनीकांत वर्मा, विक्की, किशन आदि ने अपना सहयोग दिया। मीडिया मैनेजमेंट सोनाली श्रीवास्तव, लाइटिंग करण और संगीत समायोजन रजनीकांत वर्मा ने किया। नाटक का मंचन देखने के लिए भवन में सैकड़ों की संख्या में दर्शक मौजूद थे।

अतिथियों की सुनिए…
शहर में ऐसे आयोजन होते रहना चाहिए: जायसवाल
इस अवसर पर शहर के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार सतीश जायसवाल ने इसे बेहतरीन प्रस्तुति बताया। शहर में ऐसे हिंदी साहित्य एवं नाट्य कलाओं का आयोजन हमेशा होते रहने चाहिए। इससे हमारी सांस्कृतिक विरासत समृद्ध होती है और हमारी संवेदनाओं का विसरत होता है।

थिएटर के कलाकारों को री-टेक का मौका नहीं मिलता: हनीफी
एसईसीएल के प्रियदर्शिनी कला मंदिर के सचिव हनीफी ने कहा कि अभी तक हम सिर्फ अग्रज नाटक कला समूह को ही जानते थे। आज से एसईसीएल में आवर्तन थिएटर ग्रुप को भी जाना जाएगा। ग्रुप के सभी कलाकारों ने सुंदर प्रस्तुति दी है। उन्होंने थिएटर की गंभीरता और अभिनय की बारीकियों के बारे में बताते हुए कहा कि थिएटर में कलाकारों को कभी री-टेक का मौका नहीं मिलता। आज के बाद आवर्तन थिएटर ग्रुप बिलासपुर को नाटक की रिहर्सल के लिए यह एसईसीएल स्थित प्रियदर्शिनी क्लब हमेशा खुला रहेगा।

हर कलाकारों में दिखा कुछ कर गुजरने का जुनून: दुबे
नाट्य प्रस्तुतियों की बारीकियों और निर्देशन की विशिष्टता पर बात करते हुए सीवी रमन विश्वविद्यालय के कुलपति रविप्रकाश दुबे ने कहा कि आवर्तन थिएटर ग्रुप की प्रस्तुति शानदार रही है। ग्रुप के कलाकारों में कुछ कर दिखाने का जोश दिखाई दे रहा है। हम चाहते हैं कि आगे भी इस ग्रुप को हमारा और सभी बिलासपुर वासियों का सहयोग मिलता रहे।

निर्देशक प्रोफेसर सोनी के बारे में जानिए
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी साहित्य के असिस्टेंट प्रोफेसर कृष्ण सोनी ने इस नाटक का अनुवाद और निर्देशन किया है। नाटक में लेखक का जीवन जिस नाटकीय अंदाज में अभिव्यक्त किया गया है, वह भारतीय रंगमंच में अतुलनीय है। निर्देशक ने लेखक के जीवन को रचना प्रक्रिया के समानांतर जीवन के विविध रंगों के माध्यम से प्रस्तुत किया है।

अभी तक ग्रुप ने एक रंग कार्यशाला, पंचलाइट का मंचन एवं शहर के कई हिस्सों में तीन नुक्कड़ नाटक का मंचन किया है। प्रोफेसर सोनी ने अब तक लगभग एक दर्जन नाटकों का निर्देशन किया है, जिसमें इंद्रजीत, आषाढ़ का एक दिन, अंधेर नगरी, प्रेम गली अति संकरी, आखिरी अदालत, नन्हों, पंच लाइट आदि शामिल हैं।

आवर्तन थिएटर ग्रुप का उद्देश्य
आवर्तन थियेटर ग्रुप बिलासपुर शहर के युवाओं का एक नाट्य दल है। इस थियेटर ग्रुप की स्थापना फ़रवरी 2018 में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शहर के युवाओं एवं सांस्कृतिक कर्मियों ने की है। इसका मूल उद्देश्य रंगकर्म के माध्यम से सामाजिक सांस्कृतिक परिवेश को ऊर्जावान बनाना और युवाओं के व्यक्तित्व के विकास में रंगमंच की भूमिका को समझाना और समझाना है।

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