अनियमित कर्मचारियों की हड़ताल का पन्द्रवा दिन

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क्रमिक भूख हड़ताल का पांचवा दिन

रायपुर, छ.ग. संयुक्त प्रगतिशील कर्मचारी महासंघ के बैनर तले अनियमित कर्मचारियों की हड़ताल का आज पन्द्रवा दिन था । महासंघ के राज्य स्तरीय हड़ताल में पूरे प्रदेश से एक लाख से अधिक अनियमित कर्मचारी रायपुर में धरने पर बैठे हैं । महासंघ के सदस्य आज भी शांतिप्रिय ढंग से अपनी मांगों के समर्थन में हड़ताल पर बैठे रहे I राजधानी स्थित धरना स्थल की अव्यवस्थाओं को लेकर हड़ताली कर्मचारियों में रोष नज़र आ रहा है । महासंघ के अध्यक्ष अनिल देवांगन ने कहा कि यह स्थिति शर्मनाक है, प्रदेश में जानबूझकर महिला अनियमित कर्मचारियों पर बेंत प्रहार शासन द्वारा कराया गया है, वहीं शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे कर्मचारियों को धरना स्थल में भी बदहाल स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है । यहां ना तो स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता है ना ही प्रसाधन आदि की । पूरे प्रदेश से आए हुए आंदोलनकारियों पर राजधानी की अच्छी छवि नहीं जा रही है । इनमें से कई आंदोलनकारी तो पहली बार राजधानी पहुंचें हैं, उनका कहना है कि सुदूर जिलों में रहते हुए उन्होंने राजधानी की बहुत अच्छी छवि अपने दिलों में बना रखी थी, लेकिन यहां की अव्यवस्था देखकर उनका दिल टूट गया है ।
आज प्रथम सावन सोमवार के उपलक्ष्य में बाबा भोलेनाथ से नियमितीकरण कीअर्जी लगाते हुए महासंघ के प्रांतीय अध्यक् अनिल देवांगन स्वयं भूख हड़ताल पर सपत्नीक बैठे, उनका साथ देने के लिए प्रदेश के शेष आंदोलनकारियों में से 1000 अन्य लोग भी क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं । उल्लेखनीय है कि यह क्रमिक भूख हड़ताल निश्चित समयसीमा के पश्चात आमरण अनशन में परिवर्तित हो जाएगी
उन्होंने हड़ताली कर्मचारियों के आक्रोश को बयान करते हुए बताया कि अब यह लड़ाई आर या पार की बन चुकी है तथा अपने संविधान प्रदत्त अधिकारों की प्राप्ति के लिए हम सब किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं । यह देखा जाना होगा की इतनी अधिक संख्या में उपस्थित आन्दोलनकारियों को सरकार कब तक नज़रअंदाज़ करेगी I आज से अनियमित कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत शुरू होने की प्रबल संभावना है ।

अनियमित कर्मचारियों की क्या है मांगे?

छग संयुक्त प्रगतिशील के प्रांतीय उपाध्यक्ष हेमंत सिन्हा ने बताया कि संघ सेवावृद्धि एवं सेवा से पृथक करने का भय समाप्त करने, वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने, विगत कुछ वर्षों में सेवा से पृथक किए गए कर्मचारियों को सेवा में बहाल करने, शासकीय, अर्धशासकीय कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारी, अधिकारियों को नियमित करने, आउट सोर्सिंग, ठेका प्रथा पूर्ण रूप से बंद कर शासकीय सेवक का दर्जा देने की मांग प्रमुख है।

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